गुलदावरी में भर जाएंगे फूल! सही खाद, दवाई और देखभाल का 17 साल का नर्सरी सीक्रेट

गुलदावरी में भर जाएंगे फूल! सही खाद, दवाई और देखभाल का 17 साल का नर्सरी सीक्रेट

क्या आपने भी गुलदावरी का पौधा बड़े ही शौक से खरीदा है? लेकिन उस गुलदावरी के पौधे में फूल आने के बजाय सिर्फ पत्तियाँ ही बढ़ रही हैं तो परेशान मत होइए। कई बार पौधे में खाद की कमी नहीं होती है बल्कि धूप, पानी छंटाई या दूसरी देखभाल में कोई गड़बड़ी होने के कारण हो सकते हैं।

कई बार हम लोग पौधे में फूल कम देखते ही तरह-तरह की खाद और दवाई डालना शुरू कर देते हैं। लेकिन यह सबसे बड़ी गलती हमारी होती है कि हम बिना पौधे की परेशानी पहचाने खाद या दवा ही डालने से पौधे को और खराब करते जाते हैं।

इस लेख में हम गुलदावरी की मिट्टी से तैयार करने से लेकर के खाद, पानी छंटाई, फूल बढ़ाने और कीट बीमारियों से बचाव तक की जानकारी समझेंगे।

मैं यहाँ नर्सरी में काम के दौरान सीखी गई बातों पर ही ध्यान दूँगा ताकि आप अपने घर की बालकनी, छत या आंगन में लगे गुलदावरी के पौधे की देखभाल अच्छे से कर सकें। एक बात हमेशा याद रखिए, गुलदावरी के पौधे में अच्छे फूल के लिए कोई जादुई खाद नहीं होता है। सही मिट्टी, पर्याप्त रोशनी, संतुलित खाद और सही समय पर छंटाई इन सब को मिलाकर के देखभाल करना ही सबसे अच्छा होता है

1 गुलदावरी का पौधा लगाने का सही समय क्या है?

गुलदावरी का पौधा मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में अधिक लगाया जाता है। भारत के कई इलाकों में इसकी ग्रोथ और फूल आने का समय मौसम और किस्म और पौधे की उस अवस्था के हिसाब से बदलती रहती है।

छत्तीसगढ़ जैसे इलाकों में अक्टूबर के आसपास सर्दियों के फूलों की तैयारी शुरू हो जाती है। अगर आप भी गुलदावरी का पौधा लगाने की सोच रहे हैं तो आप अक्टूबर के महीने में इस पौधे को लगा सकते हैं। आप चाहे तो नर्सरी से एक स्वस्थ पौधा चुनकर ला सकते हैं। पौधा चुनते समय आपको उनकी पत्तियाँ देखनी है जो कि हरी हो, तना मजबूत हो और मिट्टी से मिट्टी भी उसकी अच्छी हो।पौधों में कलिया दिखाई दे रही हो तो उसे खरीदते समय जड़ों और पत्तियों की हालत भी आप अच्छी तरह से देख लें।

नर्सरी वाला सुझाव केवल बड़े-बड़े फूल देखकर आप पौधा ना खरीदें। कभी-कभी ऊपर से जो पौधा अच्छा दिखता है वह नीचे कमजोर होता है। उसकी पूरी हालत देखकर ही आप पौधे का को खरीदें |

2. गुलदावरी के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी रहती है?

अगर भाई आप गुलदावरी की अच्छी ग्रोथ और ज्यादा फूल पाना चाहते हैं तो आपको उसकी मिट्टी सबसे अच्छी रखनी होगी, जिसमें पौधे की जड़ों को हवा आसानी से मिल सके और जमा हुआ पानी उसमें आसानी से बाहर निकल सके। सर्दियों में गमले की मिट्टी की पूरी जानकारी के लिए हमारी यह गाइड पढें |

अगर मिट्टी में पानी लंबे समय तक अगर भरा रहता है तो उससे जड़ों को नुकसान पहुंचती है और जड़ें सड़ने लगती हैं, जिससे पूरे पौधे पूरी तरह से खराब हो जाते हैं।

गमले के लिए आप भी साधारण मिट्टी तैयार कर सकते हैं:

सामग्री मात्रा

अच्छी वाली बगीचे की मिट्टी 40%

अच्छी तरह सड़ी हुई गोबेर खाद 30%

कोकोपीट 20%

मोती रेत 10%

यह एक ऐसा मिश्रण है जो कि गुलदाउदी के पौधे के लिए अच्छा साबित हो सकता है क्योंकि इस मिश्रण में वह सब चीजें मिली हुई हैं जो कि पौधे को अच्छी तरह से ग्रोथ और फूल लाने में मदद करेगा। इसलिए आप इस मिश्रण का आसानी से उपयोग कर सकते हैं।

एक जरूरी बात: गमले के नीचे पानी निकलने के लिए आपको छेद छोड़ना ही होगा। बिना पानी निकलने में के आप पौधे को अच्छी तरह से ग्रोथ नहीं दे सकते हैं।

अगर आप गोबर खाद का इस्तेमाल करेंगे तो अच्छी सड़ी हुई गोबर खाद ही डालना है। ताजी गोबर या कच्ची गोबर का इस्तेमाल आपको बिल्कुल भी नहीं करना है।

3. गुलदावरी में कौन सी खाद डाले?

यह सवाल सबसे जरूरी है क्योंकि बहुत से लोग पूछते रहते हैं कि गुलदावरी में कौन सी खाद डाला जाए जिससे कि उसमें फूल जल्दी आए और ढेर सारे आएं तो सच बात बताए तो खाद का आपको चुनाव पौधे की उम्र उसकी ग्रोथ मिट्टी और फूल आने की पूरी अवस्था को देखना है।

जैविक खाद

अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर खाद या किसी प्रकार का कंपोस्ट खाद मिट्टी में उसकी गुणवत्ता सुधारने में मदद करती है।

वर्मी कंपोस्ट

वर्मी कंपोस्ट पौधे को न मिलने वाली पोषण तत्व देने में मदद करता है। लेकिन ज्यादा खाद डालने से पौधा हमेशा ज्यादा फूल नहीं देता है बल्कि वह नुकसान ही पहुंचाता है। गमले में जितना खाद की जरूरत हो उतना ही आप खाद डालेंगे

NPK खाद

अगर पौधों को बहुत ज्यादा पोषक तत्वों की कमी आ गई है तो नपक खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन हर पौधे में आपको एक समान उस खाद का उपयोग नहीं करना है। ऑर्गेनिक का उपयोग आप पौधे की पूरी देखरेख में ही करेंगे और गमले में पौधे के अनुसार ही आप डालेंगे।

नर्सरी वाला अनुभव: अगर आपके गुलदावरी के पौधे में फूल कम दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत खाद डालने के बजाय आप पहले पौधे को देखें कि उसे पर्याप्त धूप मिल रहा है या नहीं, मिट्टी बहुत ज्यादा गीली तो नहीं है। पौधे में पत्तियों की ग्रोथ कैसी है? कई बार समस्या खाद डालने से नहीं होती है बल्कि पानी और अच्छी धूप ना मिलने के कारण पौधे में फूल नहीं आते हैं।फूलों के पौधों में खाद सही इस्तेमाल समझने के लिए गुलाब की देखभाल वाली हमारी गाइड भी पढें |

4. गुलदावरी में फूल ज्यादा कैसे लाएं?

अगर आप भी चाहते हैं कि आपके गुलदावरी के पौधे में अच्छी तरह से फूल आए और वह फूल लंबे समय तक चले तो आपको इन बातों का ध्यान देना होगा।

पहली बात- पर्याप्त रोशनी। गुलदावरी के पौधे को आपको ऐसी जगह पर रखनी है जहाँ उसको रोशनी अच्छी तरह से मिल सके। धूप की जरूरत आपको पौधे की वैरायटी और मौसम के अनुसार बदलते रहना है। तेज गर्मी में छोटे गमले को नहीं रखना है। वहीं तैयार पौधे को आप थोड़ी धूप देंगे तो उसमें वह पौधा अच्छी तरह से ग्रोथ करेंगे।

दूसरी बात-पानी की सही संतुलन। मिट्टी को देखकर पानी देना है। आपको ऊपर की हल्की सूखने लगे मिट्टी तो आप पानी दे दें। अगर मिट्टी लगातार गीली है तो आपको पानी नहीं देना है।

तीसरी बात-सीमित मात्रा में खाद। आपको पौधे की ग्रोथ और फूल लाने के अनुसार ही खाद देना है। जरूरत से ज़्यादा नाइट्रोजन देने से पत्तियाँ सिर्फ बढ़ती हैं और उसमें फूल नहीं आते हैं। इसलिए आपको इस बात का भी ध्यान रखना है।

चौथी बात- सही समय पर पिंचिंग। पिंचिंग यानी पौधे की बढ़ती हुई ऊपर की नोक को हल्के से हटाना। इससे कई वैरायटी में शाखाएँ नीचे की तरफ से ग्रोथ करती हैं और पौधा बुसी बन जाता है जिससे कि उन गुलदावरी के पौधे में और ज्यादा फूल आने लगते हैं। इसलिए आपको पिंचिंग सही समय पर करना है जिससे कि पौधे में ज्यादा से ज्यादा फूल आ सके।

पाँचवीं बात- पौधे को बार-बार परेशान ना करें। आप गुलदावरी के पौधे के गमले को किसी जगह पर बार-बार बदलते रहेंगे, उसे बार-बार खाद देंगे या जड़ों को छेड़ेंगे तो वह पौधा स्थिर नहीं होगा और वह जब तक स्थिर नहीं होगा, वह ग्रोथ नहीं करेगा |

5. गुलदावरी की पिंचिंग और छंटाई कब करें?

गुलदावरी के पौधे की पिंचिंग करने का मकसद एक ही होता है। पौधे में ज्यादा शाखाएँ होंगी तो उसमें ज्यादा फूल भी आएंगे। जब आप गुलदावरी के पौधे को गमले में लगा दें और वह कुछ दिनों बाद सेट हो जाए तो उसकी ऊपर की नोक को हल्के से हटा दें।

लेकिन एक बात आपको समझना है कि सभी गुलदावरी की वैरायटी एक ही समय पर काटना सही नहीं है |

  • छोटी और झाड़ीदार ग्रोथ वाली वैरायटी में शुरुआती पिंचिंग आप कर सकते हैं।
  • फूल आने के करीब पहुँच चुके पौधे को आपको पिंचिंग नहीं करनी है।
  • सूखी, टूटी या रोगग्रस्त टहनियाँ हमेशा साफ करते रहना है।
  • फूल आने की अवस्था में बिना वजह शाखाओं को नहीं छेड़ना है।

अगर आपके पौधे पर पहले से कलियाँ बन गई हैं तो आपको उसकी छटाई नहीं करना हैं |

6. गुलदावरी में पत्तियाँ पीली क्यों हो जाती हैं?

गुलदाउदी के पत्तियाँ पीली पड़ने के कई कारण हो सकते हैं हर बार इसका मतलब खाद की कमी नहीं हो सकता |

आम कारण ये हो सकते हैं:

  • मिट्टी में जरूरत से ज़्यादा पानी का रहना है।
  • इससे जड़ों को नुकसान पहुँचना |
  • पोषक तत्वों की कमी होना।
  • कीटों का हमला प्राकृतिक रूप से पत्तियों का पीला पड़ना |

अगर आपके गुलदाउदी में नीचे की कुछ पत्तियाँ पीली हैं तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन अगर नई पत्तियाँ भी पीली हो रही हैं तो यह पौधे की ग्रोथ रोक सकती है। उसे आपको तुरंत ही जाँचना है।

क्या करें?

सबसे पहले मिट्टी की नमी और गमले में पानी की निकासी वाली व्यवस्था को चेक करें। पत्तियों के नीचे की तरफ कीट को भी देखें। बिना कारण पता लगाए आप लगातार उसमें खाद नहीं डालना है |

7. गुलदावरी में कौन सी दवाई डालें?

अब आते हैं गुलदारी गुलदावरी की दवाई की यहाँ सबसे बड़ी गलती लोग यही करते हैं कि बिना कीट की पहचान किए हुए कोई भी स्प्रे या दवाई कर देते हैं।

गुलदावरी में समस्या के अनुसार ही आपको उनके उपाय करने होंगे:

एफिड्स या माहू

ये छोटे छोटे कीट नई पत्तियों और कोमल टहनियों पर दिखाई देते हैं। पत्तियाँ मुड़ने लगें या नई ग्रोथ पर छोटे कीट आपको नजर आएं तो उसे ध्यान से देखें और उनके अनुसार ही आप दवाई इस्तेमाल करें। और आपको अपने पौधे को भी देखना होगा |

उसे बाद ही दवाई डालना होगा अगर यह कीट बहुत कम है तो आप उन्हें पानी की धार से भी आसानी से निकाल सकते हैं। इसे अपने पौधे को दवाइयों से बचाया जा सकता है।

मिलीबग

ये सफेद रुई जैसे गुच्छों में दिखाई देते हैं जो कि पत्तियों और तनों पर जोर से पकड़े हुए होते हैं और यह जल्दी से निकलते भी नहीं हैं और पौधे को पूरी तरह से खराब कर देते हैं। इसलिए आप मिलीबग को अपने पौधे पर देखते रहना होगा क्योंकि यह बहुत खतरनाक होते हैं। और इसका आपको जल्दी से जल्दी उपचार करना होगा।

फंगस और जड़ सड़ना

अगर मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है तो पौधा मुरझाए जाएगा और जब पौधा मुरझाए तो पौधे की जड़ समझिए कि सड़ना चालू हो गया है। तो आप को गमले की पानी निकालने की तरफ देखना होगा |

मेरे नर्सरी का सीधा नियम: मै सबसे पहले पौधों पर उन समस्याओ को पहचानता हूँ,उसके बाद ही किसी प्रकार की दवाई का इस्तमाल करता हूँ,आप भी इस नियम को अपना सकते है |

8. गुलदावरी में कलियाँ सूखने या गिरने के क्या कारण हैं?

अगर आपके पौधे की कलियां तो बन रही हैं लेकिन वो खिलने से पहले ही सूख जा रही हैं तो आपको कुछ चीजों की जांचना जरूरी है।

1. पानी की कमी: अगर मिट्टी बार-बार कोई तरह से सूख जा रही है तो पौधे की कलियां सूखकर गिर सकती हैं।

2. ज्यादा पानी: लगातार गीली मिट्टी होने से जड़ों को भारी नुकसान होता है, जिसके कारण उसका पूरा प्रभाव पौधे पर होता है, जिससे कि कलियां उसका शिकार हो जाती हैं।

3. मौसम का असर : बहुत ज्यादा गर्मी, अचानक मौसम में बदलाव, तेज हवा पौधे को बहुत ज्यादा प्रभावित करते हैं, जिसके कारण पौधा खराब होने लगता है।

4. कीट: कलियों और नई वृद्धि पर छोटे-छोटे कीट जो होते हैं, उसकी जांच आप करें, नहीं तो ये पौधे को खराब कर देते हैं।

5. पोषक की समस्या: जरूरत पड़ने पर खाद या जरूरत से ज्यादा खाद देना भी पौधे के लिए हानिकारक हो सकता है।

सबसे पहले आपको मिट्टी, मौसम और पौधे की अच्छी तरह से जांच करना है, उसके बाद ही आपको इन समस्याओं को समझने के बाद सुधार करना है।

9. गुलदावरी में फूल आने का समय कितना होता है?

गुलदावरी में फूल आने का समय उसकी वैरायटी, मौसम और पौधे की उस उम्र और देखभाल पर ही निर्भर करता है। कुछ गुलदावरी की ऐसी वैरायटियां होती हैं जो जल्दी ही उसमें कलियां बनने लगती हैं, जबकि कुछ में थोड़ा ज्यादा समय लग जाता है।

पौधे जब आप नर्सरी से पौधे खरीदते हैं तो उसमें आपको यह ध्यान रखना होगा कि उसकी वैरायटी और फूल आने की, आगे फूल आने के चांस ज्यादा दिखे वही पौधे आपको खरीदना चाहिए। अगर आपके पौधे में सिर्फ पत्तियां बढ़ रही हैं फूल नहीं आ रहे हैं तो आपको यह नहीं मानना है कि उसमें फूल नहीं आएंगे। फूल आएंगे लेकिन हो सकता है कि थोड़ी देर से आएं। इसलिए आपको यह जानते रहना है कि पौधे पर अच्छी तरह से धूप मिल रहा है कि नहीं।

क्योंकि अगर धूप पौधे को नहीं मिलेगा तो वह फूल खिलने में और ज्यादा समय लग जाता है, इसलिए आपको इस बात का ध्यान रखना है और नाइट्रोजन वाली खाद से आपको दूरी रहना है क्योंकि यह पत्तियों को बढ़ाता है फूल कम कर देता है।

10. गुलदावरी की देखभाल में आपको ये 7 गलतियाँ बिल्कुल भी नहीं करनी हैं।

अगर आप इन गलतियों से बचेंगे तो आपके भी पौधे की देखभाल करने में आसानी हो सकती है।

  1. मिट्टी सूखी या गीली या देखे बिना पानी नहीं डालना है।
  2. हर दिन नई खाद का उपयोग नहीं करना है।
  3. कलिया बन जाएने के बाद गलत समय में उसकी छटाई नहीं करनी है।
  4. पौधे को बहुत कम रोशनी वाली जगह पर नहीं रखना है।
  5. बिना पहचान किए किसी भी प्रकार के कीटनाशक या आपको नासक दवाइयों को छिड़काव नहीं करना है।
  6. जल निकलने के लिए आपको कमरे में छेद रखना है।
  7. पौधे की समस्या आते ही उसे पौधा में समस्या आते ही उसे उखाड़कर फेंक देना, जबकि पहले आप उसे के कारण को पहचानकर उसका उपचार कर सकते हैं।

याद रखिए, गुलदावरी की अच्छी देखभाल का मतलब यह नहीं होता है कि ज़्यादा खाद और ज़्यादा दवाई डाल देने से वह अच्छी हो जाएगी। आपको उसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा देखते रहना है और उसकी देखभाल ही सबसे बड़ी चीज़ होती है जो कि पौधे की ग्रोथ और फूलों को बढ़ाने में मदद करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. गुलदावरी में कौन-सी खाद डालनी चाहिए?

अच्छी तरह से सड़ी हुई जैविक खाद या आप गोबर खाद डाल सकते हैं। जब आपको लगे कि पौधे को किसी खाद की ज़रूरत है तो आप सीमित मात्रा में उसका भी उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यहाँ आप अपने पौधे को देखकर ही उपयोग करें।

2. गुलदावरी में ज़्यादा फूल कैसे लाएँ?

गुलदावरी में ज़्यादा फूल लाने के लिए आपको उसे पर्याप्त रोशनी, संतुलित मात्रा में खाद, सही पानी और वेरायटी के अनुसार समय पर उसकी पिंचिंग करनी होगी।

3. गुलदावरी की पत्तियाँ पीली क्यों हो जाती हैं?

जब आप गुलदावरी के पौधे में ज़्यादा पानी डालेंगे तो उससे उसकी जड़ों को हानि नुकसान होता है, या फिर एक कारण यह भी हो सकता है कि जब उसे पोषण तो भी कमी हो रही है और आप उसे अनदेखा कर रहे हैं तो उससे भी उसकी पत्तियाँ पीली हो सकती हैं।

4. क्या गुलदावरी में रोज़ पानी देना चाहिए?

यह ज़रूरी नहीं है कि आप गुलदावरी के पौधे में रोज़ पानी दें, यह मिट्टी के ऊपर डिपेंड करता है कि कमरे की मिट्टी सूखी है या गीली है और मौसम देखकर ही आप पानी का इस्तेमाल करें तो आपके पौधे स्वस्थ रहेंगे।

5. गुलदावरी में दवाई कब डालनी चाहिए?

जब पौधे पर बहुत छोटे-छोटे कीट पत्तियों को पूरी तरह से खराब कर रहे हों, तब आपको उनके बीमारी को पहचानना है और उसके बाद उसे नियंत्रित करने वाली दवाइयों का प्रयोग करना है। आपको उसे ऐसे ही न डालें, आप उसके लिए स्प्रे का इस्तेमाल करें।

6. गुलदावरी की छंटाई कब करनी चाहिए?

यह आपके गुलदावरी के वेरायटी और पौधे की अवस्था पर निर्भर करता है। जब शुरुआती दौर में आप पौधे पर की पिंचिंग करते हैं तो वह पौधा बहुत ही बुसी और ग्रोथ में होता है, जिसमें कि फूल भी उसकी तरह ही ज़्यादा आने के चांसेस बढ़ जाते हैं।

मेरे नर्सरी अनुभव में गुलदावरी के पौधे की में क्या देखभाल करता हूँ।

मैं जब गुलदावरी के पौधे को लगाता हूँ तो सबसे पहले उसकी मिट्टी को चेक करता हूँ कि यह मिट्टी सही है कि नहीं। मिट्टी ही पौधे को ग्रोथ और फूल लाने में सबसे पहला काम करता है क्योंकि मिट्टी ही सही नहीं होगी तो पौधे के जड़ों को फैलने में बहुत दिक्कत होती है, जिससे कि उसकी ग्रोथ पूरी तरह से रुक जाती है।

इसलिए मिट्टी को आपको देखना जरूरी है। वहीं मिट्टी के बाद आता है पानी। पानी पौधों के लिए बहुत ही जरूरी होता है क्योंकि अगर आप पौधों को पानी सही मात्रा में नहीं देंगे या बहुत ज़्यादा देंगे तो वे नुकसान कर देता है। इसलिए आपको पानी का भी विशेष रूप से ध्यान देना है। फिर आता है इसके लिए पर्याप्त धूप। पर्याप्त धूप इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि पौधे की ग्रोथ और उसके फूल के लिए आपको उसे रोशनी पानी ही पड़ेगी।

इसलिए मैं पौधों को रोशनी वाली जगह पर रखता हूँ जिससे कि उसे पर्याप्त मात्रा में Sunlight मिलती रहे और पौधे की ग्रोथ अच्छी तरह से बढ़ती रहे। इसी कारण पौधे हरे और ज़्यादा फूल देने वाले बनते रहेँ। फिर आता है खाद, जो कि ज़रूरत पड़ने पर खाद देना भी पौधों के लिए ज़रूरी होता है, जिसमें कि जैविक खाद या सड़ी हुई गोबर खाद का इस्तेमाल मैं ज़्यादा करता हूँ क्योंकि यह पौधों को नुकसान नहीं पहुँचाते हैं बल्कि मिट्टी में पोषण देकर उसको मजबूत करते हैं |

जिससे कि पौधे की ग्रोथ अच्छी होती है। समय-समय पर कीटों और फंगस की देखभाल करना भी अपना ही ज़रूरी होता है क्योंकि पत्ती ही नहीं रहेंगी तो उसमें फूल कहाँ से आएंगे। इसलिए आपको पौधों को थोड़ा-थोड़ा देखते रहना है, जिससे कि उसकी बीमारियों का पता चल सके। बस यही कुछ आसान से तरीके हैं, जिसे आप अपनाकर अपने पौधों की अच्छी तरह से देखभाल और उसमें ज़्यादा फूल ला सकते हैं और अपने घर और गार्डनों को फूलों से भर सकते हैं।

निष्कर्ष: गुलदावरी में फूल बढ़ाने का असली तरीका

आप भी चाहते हैं कि आपके गुलदावरी के पौधे अच्छे और स्वस्थ रहें और उसमें फूल लगातार और ज्यादे आते रहें तो सबसे पहले आपको मिट्टी, पानी, धूप और उसी ग्रोथ पर बहुत ही ज़्यादा ध्यान देना होगा। सिर्फ खाद डालते रहना या बार-बार दवाई का छिड़काव करने से फूल की गारंटी नहीं मिलती है।सर्दियों में दूसरे फूलों के पौधे लगाने की जानकारी के लिए हमारी Winter Flower Plant गाइड देखें।

पौधे को, पौधे की आपको ज़रूरत समझनी पड़ेगी और उसको रोज़ थोड़ा-थोड़ा देखते रहना होगा क्योंकि यही देखभाल आपके पौधे को अच्छी ग्रोथ और फूल लाने में मदद करेगी।

नर्सरी में मैंने काम करते समय सबसे उपयोगी बात यही सीखी है कि हर पौधे की हालत देखकर फैसला करना ज़रूरी होता है, सिर्फ एक नुस्खा हर पौधे पर आपको नहीं अपनाना है। आपके गुलदावरी के पौधे में अभी क्या परेशानी है, फूल नहीं आ रहे हैं, पत्तियाँ पीली हैं या कलियाँ सूखी हैं, आप हमें नीचे comment बॉक्स में बताइए |